हमारी संस्कृति में किसी भी पूजा-पाठ, यज्ञ, अनुष्ठान का शुभारंभ श्रीगणेश की पूजा से होता है। उसी प्रकार बिना तिलक धारण किए कोई भी पूजा-प्रार्थना आरंभ नहीं होती। मान्यता अनुसार सूने मस्तक को अशुभ और असुरक्षित माना जाता है। तिलक चंदन, रोली, कुंकुम, सिंदूर या भस्म का लगाया जाता है। पूजा-पाठ के अलावा शुभ अवसर पर तिलक लगाना प्रसन्नता का, सात्विकता का और सफलता का चिन्ह माना जाता है। किसी महत्वपूर्ण कार्य या विजय अभियान में निकलने पर भी तिलक लगाया जाता है। आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें और जानें तिलक लगाने का महत्व और उसके फायदे-
माथे पर तिलक लगाने के पीछे आध्यात्मिक महत्व है। दरअसल, हमारे शरीर में 7 सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र होते हैं, जो अपार शक्ति के भंडार हैं। इन्हें चक्र कहा जाता है। माथे के बीच में जहां तिलक लगाते हैं, वहां आज्ञाचक्र होता है। यह चक्र हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, जहां शरीर की प्रमुख तीन नाडि़यां इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना आकर मिलती हैं। इसलिए इसे त्रिवेणी या संगम भी कहा जाता है। यह गुरु स्थान कहलाता है। यहीं से पूरे शरीर का संचालन होता है। यही हमारी चेतना का मुख्य स्थान भी है। इसी को मन का घर भी कहा जाता है। इसी कारण यह स्थान शरीर में सबसे ज्यादा पूजनीय है।
तिलक लगाने से एक तो स्वभाव में सुधार आता है, साथ ही देखने वाले पर सात्विक प्रभाव पड़ता है। तिलक लगाने का मनोवैज्ञानिक असर भी होता है। इससे व्यक्ति के आत्मविश्वास और आत्मबल में इज़ाफा होता है।
ललाट पर नियमित रूप से तिलक लगाने से मस्तक में तरावट आती है। लोग शांति व सुकून का अनुभव करते हैं। नियमित रूप से तिलक लगाने से सिरदर्द की समस्या में कमी आती है और यह कई तरह की मानसिक बीमारियों से बचाता है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, तिलक लगाने से ग्रहों की शांति होती है। तिलक खास प्रयोजनों के लिए भी लगाए जाते हैं। मोक्षप्राप्ति करनी हो तो तिलक अंगूठे से, शत्रु नाश करना हो तो तर्जनी से, धनप्राप्ति हेतु मध्यमा से और शांति के लिए अनामिका से तिलक लगाया जाता है। तिलक संग चावल लगाने से लक्ष्मी आकर्षित होती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंदन का तिलक लगाने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और लोग कई तरह के संकट से बच जाते हैं। साथ ही चंदन का तिलक लगाने वाले का घर अन्न-धन से भरा रहता है और सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है।
05:54
Astro SK
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