Friday, 5 December 2014

सुन्दरकांड में रावण की सेना हनुमानजी की पूंछ में आग लगा देती है जिससे बाद में हनुमानजी पूरी सोने की लंका को जला कर राख कर देते हैं। लेकिन लंकादहन के पीछे हनुमानजी भी एक बड़ी ही रोचक कथा जुड़ी है, इसी कथा प्रसंग के कारण हनुमान ने अपनी जलती हुई पूंछ से लंका को ध्वस्त कर दिया था।
जैसा कि आप जानते हैं कि हनुमान शिव अवतार है। यह कथा भी भगवान शिव से ही जुड़ी हुई है। रोचक कथा के अनुसार एक बार एक बार माता पार्वती की इच्छा पर भगवान भोलेनाथ ने कुबेर से सोने का सुंदर महल का निर्माण करवाया। इस महल की सुंदरता देख रावण अत्यन्त मोहित हो गया। वह ब्राह्मण का वेश बनाकर शिव के पास गया। वहां उसने महल में प्रवेश के लिए शिव-पार्वती से पूजा कराकर दक्षिणा के रूप में वह महल ही मांग लिया।
रावण को पहचान कर शिव ने प्रसन्न होकर उसे वह महल दान में दे दिया। लेकिन तुरंत ही रावण के मन में विचार आया कि यह महल असल में माता पार्वती के कहने पर बनाया गया। इसलिए उनकी सहमति के बिना यह शुभ नहीं होगा। इस पर उसने भगवान महादेव से माता पार्वती को भी मांग लिया और भोले भंडारी शिव ने इस इच्छा को भी स्वीकार कर लिया।
जब रावण उस सोने के महल सहित मां पार्वती को अपने साथ ले जाने लगा तब दुखी और अचंभित मां पार्वती ने भगवान विष्णु का स्मरण किया और उन्होंने वहां आकर माता की रक्षा की। अप्रसन्न मां पार्वती को मनाने के लिए भगवान शिव ने उन्हें वचन दिया कि त्रेतायुग में मैं वानर रूप हनुमान का अवतार लूंगा उस समय तुम मेरी पूंछ बन जाना। जब मैं माता सीता की खोज में इसी सोने के महल यानी लंका जाऊंगा तो तुम पूंछ के रूप में लंका को आग लगाकर रावण को दण्डित करना। हनुमानजी के जन्म होने और ल ंकादहन के पीछे इसी प्रसंग को कारण माना जाता है। -

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