Friday, 5 December 2014

वास्तु शास्त्र पंच तत्वों पर आधारित है। ये पंच तत्व है अग्नि, वायु, पानी, पृथ्वी व आकाश। सूर्य भी अग्नि का ही स्वरूप माना गया है। अत: सूर्य भी वास्तु शास्त्र को प्रभावित करता है। इसलिए जरूरी है कि सूर्य के उदय होने से अस्त होने तक की दिशा व समय के अनुसार ही हम भवन निर्माण करें तथा अपनी दिनचर्या का निर्धारण करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार जानिए सूर्य उदय से लेकर सूर्य अस्त तक हमें किस समय क्या कार्य करना चाहिए-
1- वास्तु शास्त्र के अनुसार मध्य रात्रि से तड़के 3 बजे तक सूर्य पृथ्वी के उत्तरी भाग में होता है। यह समय अत्यंत गोपनीय होता है। यह दिशा व समय कीमती वस्तुओं या जेवरात आदि को संभाल कर गुप्त स्थान पर रखने के लिए उत्तम है।
2- सूर्योदय से पहले रात्रि 3 से सुबह 6 बजे का समय ब्रह्म मुहूर्त होता है। इस समय सूर्य पृथ्वी के उत्तर-पूर्वी भाग में होता है। यह समय चिंतन-मनन व अध्ययन के लिए बेहतर होता है।
3- सुबह 6 से 9 बजे तक सूर्य पृथ्वी के पूर्वी हिस्से में रहता है। इसीलिए घर ऐसा बनाएं कि इस समय सूर्य की पर्याप्त रोशनी घर में आ सके।
4- सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक सूर्य पृथ्वी के दक्षिण-पूर्व में होता है। यह समय भोजन पकाने के लिए उत्तम है। रसोईघर व स्नानघर (बाथरूम) गीले होते हैं। ये ऐसी जगह होने चाहिए, जहां सूर्य की पर्याप्त रोशनी आ सके, तभी ये स्थान सूखे और स्वास्थ्यकर हो सकते हैं।
5- दोपहर 12 से 3 बजे तक विश्रांति काल (आराम का समय) होता है। सूर्य अब दक्षिण में होता है, अत: आराम कक्ष इसी दिशा में बनाना चाहिए।
6- दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक अध्ययन और कार्य का समय होता है और सूर्य दक्षिण-पश्चिम भाग में होता है। अत: यह दिशा अध्ययन कक्ष (स्टडी रूम) या पुस्तकालय (लाइब्रेरी) के लिए उत्तम है।
7- शाम 6 से रात 9 तक का समय खाने, बैठने और पढऩे का होता है। इसलिए घर का पश्चिमी कोना भोजन या बैठक कक्ष के लिए उत्तम होता है।
8- शाम 9 से मध्य रात्रि के समय सूर्य घर के उत्तर-पश्चिम में होता है। यह स्थान शयन कक्ष (बेडरूम) के लिए भी उपयोगी है।
किचन घर का मुख्य हिस्सा होता है। यहां पकने वाले भोजन से ही हमें जीवन ऊर्जा प्राप्त होती है। रसोई घर बनवाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है-
1- रसोई घर बनवाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि रसोईघर शौचालय के सामने न हो और न ही शौचालय से लगा हुआ भी नहीं होना चाहिए। और न ही रसोई व शौचालय के दरवाजे आमने-सामने होना चाहिए। अन्यथा निराशावादी, नकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी, जिससे गृहणियां सर्वाधिक प्रभावित होगीं।
2- रसोई घर बनवाते समय सर्वप्रथम इस बात का पता लगाएं कि आपके यहां वर्ष के अधिकांश समय हवा का रूख किस दिशा में रहता है। यह देखकर ही आप रसोई घर की दिशा तय करें।
3- रसोई मकान के बीच में न होकर कोने में होनी चाहिए। रसोई के बाद थोड़ी खुली जगह भी होनी चाहिए ताकि धुआं, गैस, गर्मी आदि आसानी से निकल सकें।
4- वास्तु के अनुसार ईशान दिशा को छोड़कर रसोई किसी भी दिशा में बनाई जा सकती है।
5- रसोई घर में खिड़कियां व रोशनदान पर्याप्त होना चाहिए।
6- रसोई घर सीढिय़ों के नीचे कभी नहीं बनवाएं।
वर्तमान समय में डाइनिंग हॉल का चलन बढ़ गया है। पहले भी भोजन कक्ष होते थे किंतु उनका आकार-प्रकार अलग ही होता था। घर में डाइनिंग हॉल होना संपन्नता की निशानी है। जानिए डाइनिंग रूम से जुड़ी कुछ खास बातें-
1- डाइनिंग रूम किचन से अधिक दूर नहीं होना चाहिए।
2- डाइनिंग रूम के ठीक सामने मुख्य द्वार या शौचालय नहीं होना चाहिए।
3- डाइनिंग रूम का फर्श घर के अन्य कमरों के फर्श से नीचा न हो। यदि संभव हो तो किचन व डाइनिंग रूम के फर्श को मकान के शेष फर्श से थोड़ा ऊंचा रखा जा सकता है। इससे हीन भावना नहीं आएगी।
4- जहां तक संभव हो डाइनिंग टेबल आयताकार ही हो।
5- टाण्ड या अलमारी के नीचे बैठकर भोजन नहीं करें। इससे मानसिक दबाव बनेगा जिसका असर पाचन क्रिया पर पड़ेगा।
6- डाइनिंग रूम में हवा व प्रकाश का पर्याप्त प्रबंध होना चाहिए।
बिना सोचे-विचारे मकान बनवाने पर उसमें कई वास्तु दोष आ जाते हैं। जिनका असर हमारे जीवन पर पड़ता है। वास्तु शास्त्रियों के अनुसार कुछ मामूली परिवर्तन कर इन वास्तु दोषों को समाप्त किया जा सकता है। यह उपाय इस प्रकार हैं-
1- यदि आपके घर की छत पर व्यर्थ का सामान पड़ा हो तो उसे वहां से हटा दें।
2- प्लास्टर आदि उखड़ गया हो तो उसकी तत्काल मरम्मत करवा दें।
3- यदि घर के दरवाजे व खिड़कियां खुलने व बंद होने पर आवाज करते हैं तो उनकी आवश्यक मरम्मत करवाएं।
4- आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रसोई न होने पर गैस चूल्हे को रसोई के आग्नेय कोण में रखकर दोष का निवारण कर सकते हैं। और यह भी नहीं सकते तो आग्नेय कोण में एक जीरो वाट का बल्ब जलाकर भी इस दोष से बचा जा सकता है।
5- यदि ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बोरिंग या अण्डर ग्राउंड टैंक आदि न बनवा सके हों तो इस दिशा में एक नल लगवा कर वास्तु दोष का निवारण कर सकते हैं।

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