Friday, 10 July 2015

पूर्व जन्म के कर्मों से ही हमें इस जन्म में रिश्ते मिलते हैं।

पूर्व जन्म के कर्मों से ही हमें इस जन्म में रिश्ते मिलते हैं। संतान के रूप में हमारा कोई पूर्व जन्म का 'संबंधी' ही आकर जन्म लेता है जिसे शास्त्रों में 4 प्रकार का बताया गया है-
1. ऋणानुबंध : पूर्व जन्म का कोई ऐसा जीव जिससे आपने ऋण लिया हो या उसका किसी भी प्रकार से धन नष्ट किया हो तो वो आपके घर में संतान बनकर जन्म लेगा और आपका धन बीमारी में या व्यर्थ के कार्यों में तब तक नष्ट करेगा, जब तक कि उसका हिसाब पूरा न हो।
2. शत्रु पुत्र : पूर्व जन्म का कोई दुश्मन आपसे बदला लेने के लिए आपके घर में संतान बनकर आएगा और बड़ा होने पर माता-पिता से मारपीट, झगड़ा या उन्हें सारी जिंदगी किसी भी प्रकार से सताता ही रहेगा। हमेशा कड़वा बोलकर उनकी बेइज्जती करेगा व उन्हें दुःखी रखकर खुश होगा।
3. उदासीन पुत्र : इस प्रकार की संतान न तो माता-पिता की सेवा करती है और न ही कोई सुख देती है और उनको उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ देती है। विवाह होने पर यह माता-पिता से अलग हो जाती है। यह पूर्व जन्म का पड़ोसी हो सकता है।
4. सेवक पुत्र : पूर्व जन्म में यदि आपने किसी की खूब सेवा की है तो वह अपनी की हुई सेवा का ऋण उतारने के लिए, आपकी सेवा करने के लिए पुत्र बनकर आता है। अगर आपने किसी गाय की निःस्वार्थ भाव से सेवा की है तो वह पुत्री बनकर आ सकती है।
यदि आपने गाय को स्वार्थवश पालकर उसके दूध देना बंद करने के पश्चात उसे घर से निकाल दिया हो तो वह ऋणानुबंध पुत्र या पुत्री बनकर जन्म लेगी। यदि आपने किसी निरपराध जीव को सताया है तो वह आपके जीवन में शत्रु बनकर आएगा इसलिए जीवन में कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए।
प्रकृति का नियम है कि आप जो भी करते हैं, उसे वह अगले जन्म में 100 गुना करके देती है। यदि आपने किसी को 1 रुपया दिया है तो समझो आपके खाते में 100 रुपए जमा हो गए हैं। यदि आपने किसी का 1 रुपया छीना है तो समझो आपकी जमा राशि से 100 रुपए निकल गए।

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