Tuesday, 14 April 2015

गर्दन शरीर का वह हिस्सा होता है, जिस पर सिर का भार टिका होता है। मस्तिष्क से निकलकर सभी अंगों में पहुंचने वाली नसें और नाड़ियां इसी से होकर गुजरती हैं।
मोटी गर्दन- समुद्र शास्त्र के अनुसार जिस इंसान की गर्दन सामान्य से अधिक मोटी होती है, उस पर आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता। ऐसे लोग क्रोध करने वाले होते हैं। पैसा होने पर इनमें अभिमान भी आ सकता है।
सीधी गर्दन- जिन लोगों की गर्दन सीधी होती है, ऐसे लोग स्वाभिमानी होते हैं। साथ ही ये लोग समय के पाबंद, वचनबद्ध एवं सिद्धांत प्रिय होते हैं। इन पर आसानी से विश्वास किया जा सकता है।
लंबी गर्दन- अगर गर्दन सामान्य से अधिक बड़ी हो तो ऐसे लोग बातूनी, मंदबुद्धि, अस्थिर, निराश और चापलूस होते हैं। यह अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने की आदत से लाचार होते हैं।
छोटी गर्दन- अगर गर्दन सामान्य आकार से छोटी होती है, तो ऐसे लोग कम बोलने वाले, मेहनती, कंजूस, अविश्वसनीय व घमंडी हो सकते हैं। ऐसे लोगों का फायदा दूसरे लोग उठाते हैं, मगर इन्हें इस बात का पता भी नहीं चलता।
सूखी गर्दन- ऐसी गर्दन में मांस कम होता है तथा नसें स्पष्ट दिखाई देती हैं। ऐसे लोग सुस्त, कम महत्वाकांक्षी, सदैव रोगी रहने वाले, आलसी, क्रोधी, कम समझ वाले हो सकते हैं। ये सामान्य स्तर के लोग होते हैं और अपने जीवन से संतुष्ट भी।
ऊंट जैसी गर्दन- ऐसी गर्दन पतली व ऊंची होती है। ऐसे लोग आमतौर पर सहनशील व मेहनत करने वाले होते हैं। इनमें से कुछ लोग धूर्त भी होते हैं। ये लोग अपना हित साधने में लगे होते हैं और समय आने पर किसी भी हद तक जा सकते हैं।
आदर्श गर्दन- ऐसी गर्दन पारदर्शी व सुराहीदार होती है, जो आमतौर पर महिलाओं में पाई जाती है। ऐसी गर्दन कला प्रिय, कोमल, ऐश्वर्य और भोग की परिचायक होती है। ऐसे लोग सुख का जीवन जीते हैं।

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