Tuesday, 2 December 2014

कुरुक्षेत्र में महाभारत युद्ध के समय पाण्डवों और कौरवों ने अपनी सेना के 7 और 11 विभाग अक्षौहिणी में बांटे थे। एक अक्षौहिणी में 21 हजार 870 रथ, 21 हजार 870 हाथी, 65 हजार 610 सवार और एक लाख 09 हजार 350 पैदल सैनिक होते हैं। यह प्राचीन भारत में सेना का माप हुआ करता था।
हर रथ में चार घोड़े और उनका सारथी होता था। हर हाथी पर उसका महावत बैठता था और उसके पीछे उसका सहायक, जो कुर्सी के पीछे से हाथी को अंकुश लगाता था। कुर्सी में उसका मालिक धनुष-बाण से सुसज्जित होता था और उसके साथ उसके दो साथी होते थे जो भाले फेंकते थे।
जो लोग रथों और हाथियों पर सवार होते थे, उनकी संख्या 2,84,323 होती थी। एक अक्षौहिणी सेना में समस्त जीवधारियों हाथियों, घोड़ों और मनुष्यों-की कुल संख्या 6, 34,243 होती थी। यानी 18 अक्षौहिणी सेना में समस्त जीवधारियों में हाथियों, घोड़ों और मनुष्यों-की कुल संख्या 1,14,16,374 होगी।
युद्ध हथियार और संरचाएं
महाभारत के युद्ध मे कई तरीके के हथियार प्रयोग किए गए। प्रास, ऋष्टि, तोमर, लोहमय कणप, चक्र, मुद्गर, नाराच, फरसे, गोफन, भुशुण्डी, शतघ्नी, धनुष-बाण, गदा, भाला, तलवार, परिघ, भिन्दिपाल, शक्‍ित, मूसल, कम्पन, चाप, दिव्यास्त्र, एक साथ कई बाण छोड़ने वाली यांत्रिक मशीनें।
प्राचीन समय में युद्ध के समय सेनापति को सेना के कई व्यूह बनाने पड़ते थे, जिससे की शत्रु की सेना में आसानी से प्रवेश पाया जा सके तथा राजा और मुख्य सेनापतियों को बन्दी बनाया या मार गिराया जा सके।
इसमें अपनी सम्पूर्ण सेना को व्यूह के नाम या गुण वाली एक विशेष आकृति मे व्यवस्थित किया जाता है। इस प्रकार की व्यूह रचना से छोटी से छोटी सी सेना भी विशालकाय लगने लगती है और बड़ी से बड़ी सेना का सामना कर सकती थी।
जैसा की महाभारत के युद्ध में पाण्डवों की केवल 7 अक्षौहिणी सेना ने कौरवो की 11 अक्षौहिणी सेना का सामना करके यह सिद्ध कर दिखाया। महाभारत के 18 दिन के युद्ध में दोनों पक्ष के सेनापतियों द्वारा कई प्रकार के व्यूह बनाए गए। जो इस प्रकार हैं...
क्रोन्च व्यूह, मकर व्यूह, कूर्म व्यूह, त्रिशूल व्यूह, चक्र व्यूह, कमल व्यूह, ओर्मी व्यूह, वज्र व्यूह, मण्डल व्यूह, गरुड व्यूह, शकट व्यूह, असुर व्यूह, देव व्यूह, सूचि व्यूह, चन्द्रकाल व्यूह और शृंगघटक व्यूह।

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