किसी भी घर का सबसे प्रमुख स्थान होता है किचन। क्योंकि यही वह स्थान है जहां से उस घर में रहने वाले लोगों के लिए भोजन बनता है। इसलिए किचन को अन्नपूर्णा का घर भी कहा जाता है।
लेकिन कई बार किचन में मौजूद वास्तु दोष के कारण यह मकान में रहने वाले लोगों की सेहत को भी प्रभावित करने लगता है। आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव का एक बड़ा कारण किचन में मौजूद वास्तुदोष को भी माना गया है।
अगर आप किचन के वास्तु पर जरा सा ध्यान दें तो संभव है कि आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाए। परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव में भी कमी आए।
किचन में भोजन बनाने का काम अग्नि से होता है इसलिए किचन के लिए सबसे उत्तम दिशा दक्षिण पूर्व यानी आग्नेय कोण माना गया है।
इस दिशा में किचन होने पर घर की महिलाएं प्रसन्न और स्वस्थ रहती हैं। किचन के अंदर महिलाओं की हुकूमत चलती है। परिवार में आपसी तालमेल बना रहता है।
किचन उत्तर दिशा में होना आर्थिक दृष्टि से अच्छा रहता है। जिस घर में किचन उत्तर दिशा में होता है उस घर की महिला बुद्घिमान होती है। घर की मालकिन सभी से स्नेह रखती है। लेकिन परिवार की महिलाओं के बीच आपसी तालमेल की कमी रहती है।
जिनके घर में किचन पूर्व में होता है उनके घर में धन का आगमन अच्छा रहता है लेकिन घर की पूरी कमान पत्नी के हाथ में होता है। बावजूद इसके पत्नी खुश नहीं रहती है, स्त्री रोग, पित्त रोग एवं नाड़ी संबंधी रोग का इन्हें सामना करना पड़ता है।
इन दिनों खाना पकाने में आमतौर पर गैस स्टोव का प्रयोग किया जाता है। कुछ लोग आप इंडक्शन चूल्हा भी इस्तेमाल करने लगे हैं। इन दोनों प्रकार के चूल्हों के लिए वास्तु विज्ञान में दक्षिण पूर्व यानि आग्नेय दिशा को उत्तम बताया गया है।
चूल्हा को इस तरह से रखना चाहिए कि यह दीवार से कम से कम 3 इंच हट कर हो। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह मुख्यद्वार के सामने या मुख्यद्वार से दिखाई नहीं देता हो।
भोजन पकाने समय गृहणी का चेहरा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। पश्चिम दिशा में चेहरा होने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। दक्षिण दिशा की ओर चेहरा होने पर आर्थिक परेशानी आती है। एक जरूरी बात यह ध्यान रखें कि चूल्हे के ऊपर शेल्फ नहीं होना चाहिए।
वास्तुविज्ञान के अनुसार सिंक को किचन में उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में होना चाहिए। जल और अग्नि में शत्रुता का संबंध है इसलिए इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि सिंक और चूल्हा एक सीध में नहीं हो।
चूल्हा और सिंक एक दूसरे से कुछ दूरी पर होना चाहिए। किचन से पानी का निकास उत्तर दिशा की ओर से होना शुभ माना जाता है। इस तरह से चूल्हा, सिंक और पानी के निकास का ध्यान रखने पर धन का आगमन बना रहता है।
फ्रीज और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को किचन में दक्षिण पूर्व या दक्षिण दिशा में रखना वास्तुनुकूल होता है।
लेकिन कई बार किचन में मौजूद वास्तु दोष के कारण यह मकान में रहने वाले लोगों की सेहत को भी प्रभावित करने लगता है। आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव का एक बड़ा कारण किचन में मौजूद वास्तुदोष को भी माना गया है।
अगर आप किचन के वास्तु पर जरा सा ध्यान दें तो संभव है कि आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाए। परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव में भी कमी आए।
किचन में भोजन बनाने का काम अग्नि से होता है इसलिए किचन के लिए सबसे उत्तम दिशा दक्षिण पूर्व यानी आग्नेय कोण माना गया है।
इस दिशा में किचन होने पर घर की महिलाएं प्रसन्न और स्वस्थ रहती हैं। किचन के अंदर महिलाओं की हुकूमत चलती है। परिवार में आपसी तालमेल बना रहता है।
किचन उत्तर दिशा में होना आर्थिक दृष्टि से अच्छा रहता है। जिस घर में किचन उत्तर दिशा में होता है उस घर की महिला बुद्घिमान होती है। घर की मालकिन सभी से स्नेह रखती है। लेकिन परिवार की महिलाओं के बीच आपसी तालमेल की कमी रहती है।
जिनके घर में किचन पूर्व में होता है उनके घर में धन का आगमन अच्छा रहता है लेकिन घर की पूरी कमान पत्नी के हाथ में होता है। बावजूद इसके पत्नी खुश नहीं रहती है, स्त्री रोग, पित्त रोग एवं नाड़ी संबंधी रोग का इन्हें सामना करना पड़ता है।
इन दिनों खाना पकाने में आमतौर पर गैस स्टोव का प्रयोग किया जाता है। कुछ लोग आप इंडक्शन चूल्हा भी इस्तेमाल करने लगे हैं। इन दोनों प्रकार के चूल्हों के लिए वास्तु विज्ञान में दक्षिण पूर्व यानि आग्नेय दिशा को उत्तम बताया गया है।
चूल्हा को इस तरह से रखना चाहिए कि यह दीवार से कम से कम 3 इंच हट कर हो। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह मुख्यद्वार के सामने या मुख्यद्वार से दिखाई नहीं देता हो।
भोजन पकाने समय गृहणी का चेहरा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। पश्चिम दिशा में चेहरा होने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। दक्षिण दिशा की ओर चेहरा होने पर आर्थिक परेशानी आती है। एक जरूरी बात यह ध्यान रखें कि चूल्हे के ऊपर शेल्फ नहीं होना चाहिए।
वास्तुविज्ञान के अनुसार सिंक को किचन में उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में होना चाहिए। जल और अग्नि में शत्रुता का संबंध है इसलिए इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि सिंक और चूल्हा एक सीध में नहीं हो।
चूल्हा और सिंक एक दूसरे से कुछ दूरी पर होना चाहिए। किचन से पानी का निकास उत्तर दिशा की ओर से होना शुभ माना जाता है। इस तरह से चूल्हा, सिंक और पानी के निकास का ध्यान रखने पर धन का आगमन बना रहता है।
फ्रीज और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को किचन में दक्षिण पूर्व या दक्षिण दिशा में रखना वास्तुनुकूल होता है।
04:43
Astro SK


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